Suvichar In Hindi: चाहे भूखे मर जाना पर इन 10 लोगों से कभी उम्मीद मत रखना?

Suvichar In Hindi: जिंदगी में सबसे ज्यादा दर्द तब मिलता है जब हम किसी से उम्मीद लगा लेते हैं और वो उम्मीद टूट जाती है। उम्मीद टूटने का दर्द भूख से भी बड़ा होता है क्योंकि भूख तो एक वक्त के खाने से मिट जाती है लेकिन टूटी हुई उम्मीद का घाव सालों तक नहीं भरता। हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि खुद पर भरोसा रखो और किसी के सामने हाथ मत फैलाओ। यह लेख आपको बताएगा कि किन लोगों से उम्मीद रखना अपने आप को तकलीफ देना है।

1. अपनी औलाद से।

Answer: यह सुनने में बहुत कड़वा लगता है लेकिन यह सच है। जिस औलाद को आपने अपनी पूरी जिंदगी, अपनी नींद और अपने सपने कुर्बान करके पाला हो उससे बुढ़ापे में उम्मीद रखना खुद को दर्द देना है। औलाद अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाती है। इसलिए जब तक ताकत हो खुद कमाओ, खुद जियो और औलाद से कोई उम्मीद मत रखो। जो देगी वो बोनस होगा।

2. अपने भाई से।

Answer: बचपन में एक ही छत के नीचे पले-बढ़े भाई जब अपने-अपने घर बसा लेते हैं तो रिश्ते बदल जाते हैं। भाई की अपनी जिम्मेदारियाँ होती हैं, उसकी अपनी दुनिया होती है। मुश्किल वक्त में भाई से उम्मीद रखोगे तो ज्यादातर निराशा ही मिलेगी। भाई से प्यार करो, रिश्ता बनाए रखो लेकिन अपनी जरूरतों के लिए उस पर निर्भर मत रहो।

3. अपने दोस्त से।

Answer: दोस्त अच्छे वक्त में बहुत होते हैं लेकिन बुरे वक्त में गिनती के भी नहीं मिलते। जो दोस्त खाने-पीने में साथ हो, घूमने में साथ हो लेकिन तकलीफ में गायब हो जाए वो दोस्त नहीं बल्कि एक मौसमी साथी है। ऐसे दोस्तों से उम्मीद रखना खुद को धोखा देना है। दोस्ती रखो लेकिन अपनी जरूरत के लिए उन पर कभी मत टिको।

4. अपने रिश्तेदारों से।

Answer: रिश्तेदार खुशी में जरूर आते हैं लेकिन गम में बहुत कम काम आते हैं। बल्कि कई बार रिश्तेदार आपकी तकलीफ को और बढ़ाते हैं। वो आपकी मदद करने की बजाय आपके हालात पर चर्चा करते हैं और घर जाकर सुनाते हैं। इसलिए रिश्तेदारों से शिष्टाचार निभाओ लेकिन मुश्किल वक्त में उनसे कोई उम्मीद मत रखो।

5. अपने पड़ोसी से।

Answer: पड़ोसी करीब होते हैं लेकिन हमेशा मददगार नहीं होते। कई बार पड़ोसी आपकी तरक्की से जलते हैं और आपकी तकलीफ में चुप रहते हैं। पड़ोसी से अच्छे संबंध रखना जरूरी है लेकिन उनसे किसी बड़ी मदद की उम्मीद रखना नादानी है। अपने काम खुद करो और पड़ोसी से बस जरूरत भर का ही लेना-देना रखो।

6. अपने साले या जेठ-देवर से।

Answer: ससुराल के रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं। शादी के बाद साले, जेठ या देवर से उम्मीद रखना अक्सर गलत साबित होता है क्योंकि हर कोई अपने खून के रिश्तों को पहले रखता है। ससुराल वाले मुश्किल वक्त में अपनी सगी औलाद का सोचते हैं, आपका बाद में। इसलिए इन रिश्तों में प्यार और इज्जत रखो लेकिन उम्मीद कम रखो।

7. किसी अमीर इंसान से।

Answer: अमीर लोग अपनी अमीरी बचाने में लगे रहते हैं। वो आपकी मदद तभी करते हैं जब उन्हें उससे कोई फायदा हो। बिना मतलब के कोई अमीर इंसान आपकी मदद करे यह बहुत कम होता है। अमीर से दोस्ती रखो, उनसे सीखो लेकिन उनसे मदद की उम्मीद लगाकर मत बैठो। अपनी मेहनत पर भरोसा रखो।

8. किसी नेता या बड़े आदमी से।

Answer: नेता और बड़े लोग वोट लेते वक्त या काम लेते वक्त बहुत मीठी बातें करते हैं लेकिन काम पूरा होते ही वो आपको भूल जाते हैं। उनके पास हजारों लोग होते हैं और आप उनके लिए बस एक नाम होते हो। ऐसे लोगों से किसी बड़ी उम्मीद में अपना वक्त और ऊर्जा मत बर्बाद करो। अपनी लड़ाई खुद लड़ो।

9. किसी ऐसे इंसान से जो खुद मुश्किल में हो।

Answer: जो इंसान खुद अपनी समस्याओं में डूबा हुआ हो उससे उम्मीद रखना सबसे बड़ी गलती है। वो चाहते हुए भी आपकी मदद नहीं कर सकता। ऐसे इंसान पर उम्मीद का बोझ डालना उसे और आपको दोनों को तकलीफ देता है। जो खुद तैर नहीं सकता वो आपको डूबने से कैसे बचाएगा।

10. किसी ऐसे इंसान से जिसने कभी वादा तोड़ा हो।

Answer: जिसने एक बार आपसे किया हुआ वादा तोड़ा हो उससे दोबारा उम्मीद रखना खुद को दोबारा धोखा देना है। इंसान की आदत नहीं बदलती, बस उसके बहाने बदलते हैं। जो एक बार धोखा दे वो बार-बार देगा। इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाओ और अपनी उम्मीदें सिर्फ खुद से लगाओ। खुद पर भरोसा रखो, यही सबसे बड़ी ताकत है।

Disclaimer: यह लेख केवल जीवन की सच्चाइयों को सरल शब्दों में समझाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई बातें किसी रिश्ते या व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाने के लिए नहीं बल्कि जागरूकता के लिए हैं। हर रिश्ते और हर इंसान की परिस्थिति अलग होती है इसलिए अपने विवेक से काम लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी निर्णय के परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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